Sonmadhi Cheeni Battisi । सोनमढ़ी चीनीबत्तीसी
हिंदी के एक सिद्ध कथाशिल्पी ने सही ही कहा था, अपनी कहानियों के लिए पात्र आख़िरकार कहाँ से लाए जाएँ! यानी ये अपने घर के, आसपास के लोग ही होते हैं। ये अच्छे-बुरे, श्रेष्ठ-अधम, चीकट और रहस्यमय लोग हो सकते हैं। इन्हें कथानायक बनाने के लिए बस कलात्मक और चमत्कारी झूठ का सहारा लेना पड़ता है। इन कहानियों में वही काम हुआ है। बस कोशिश हुई कि थोड़ी भाषाई हरकत और तंज़िया बाँकपन से कथा पठनीयता की गत को प्राप्त हो। यह पाठक के मिज़ाज को समझने की कोशिश भी है, क्योंकि एक अच्छी फ़िल्म और अच्छी कहानी की पहचान यह होती है कि वह कितना बाँध सकती है। चेख़व या प्रेमचंद इसीलिए महान कथाशिल्पी हैं कि वे चरित्र, परिवेश के विलक्षण रचाव के साथ पाठकों के मन को भाँपते चले। इसी कथा-पंथ के अनुसरण की कोशिश हैं ये कहानियाँ। उम्मी