smriti ki rekhaye by mahadevi verma (Grade-B)
'स्मृति की रेखाएँ' छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक, 'आधुनिक मीरा' महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और कालजयी रेखाचित्र (Sketch/Memoir) संग्रह है। १९४३ में प्रकाशित इस ऐतिहासिक कृति में महादेवी जी ने अपनी स्मृति के आधार पर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े, उपेक्षित और साधारण पात्रों का बेहद संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण किया है। इस संग्रह में शामिल सात प्रमुख रेखाचित्रों में—'भक्तिin' की अदम्य जीवन-शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा, 'ठाकुरी बाबा' की निश्चल कल्पनाशिलता, और 'गुंगिया' की मर्मस्पर्शी मूक लाचारी पाठकों की आँखों को नम कर देती है। इसके साथ ही चीनी फेरीवाले, 'जंगबहादुर' और 'मुन्नू की माई' जैसे पात्रों के माध्यम से लेखिका ने तत्कालीन ग्रामीण भारत की गरीबी, जातिगत कुप्रथाओं, रूढ़िवादिता और स्त्री जीवन के अनछुए संघर्षों को सजीव रूप प्रदान किया है। महादेवी वर्मा के गद्य की यह विशिष्टता है कि वे गंभीर तत्सम प्रधान खड़ी बोली में भी कविता जैसा रस और घनीभूत भावनाएँ पैदा कर देती हैं, जो इस पुस्तक को हिंदी साहित्य की एक अनमोल धरोहर बनाती हैं।
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