Shiv Shambhu Ke Chitthe Aur Khat by Balmukund Gupt (GRADE-A)
बाबू बालमुकुंद गुप्त द्वारा रचित 'शिवशंभु के चिट्ठे और ख़त' हिंदी साहित्य इतिहास की एक अत्यंत युगांतकारी और कालजयी रचना है, जो ब्रिटिश हुकूमत के क्रूर शासन पर अपने तीखे कटाक्षों के लिए जानी जाती है。 लेखक ने इस कृति में 'शिवशंभु शर्मा' नामक एक काल्पनिक, सीधे-साधे और भांग के नशे में मस्त रहने वाले ब्राह्मण पात्र की रचना की है, जो तत्कालीन भारत के दमनकारी वायसराय लॉर्ड कर्जन के अहंकार और उसकी साम्राज्यवादी नीतियों पर अत्यंत धारदार, उग्र और विद्रोहात्मक शैली में चिट्ठियां लिखता है। यह निबंध संग्रह मूल रूप से सन 1903 से 1905 के बीच 'भारतमित्र' पत्रिका में धारावाहिक रूप से प्रकाशित हुआ था, जिसने उस दौर में भारतीय जनता को उसकी राजनीतिक गुलामी, लाचारी और दयनीय स्थिति के प्रति जागरूक करने में एक मशाल का काम किया था। गुप्त जी ने अपनी बेजोड़, चुटीली और हास्य-विनोद से भरपूर गद्य शैली में लॉर्ड कर्जन के स्वागत, उसके कर्तव्यों की अनदेखी, बंग-भंग (बंगाल विभाजन) की साजिश और उसकी विदाई जैसे विषयों को इस तरह पन्नों पर उतारा है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम का एक अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया है
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