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Puraskar by Jaishankar Prasad (GRADE-A)
Rs. 60.00
'पुरस्कार' महाकवि और नाटककार जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित हिंदी साहित्य की एक अत्यंत लोकप्रिय, कालजयी और भावुक कर देने वाली ऐतिहासिक कहानी है। यह कहानी राष्ट्रप्रेम और व्यक्तिगत प्रेम के बीच उठने वाले भीषण अंतर्द्वंद्व और सर्वोच्च बलिदान पर आधारित है। कहानी की मुख्य पात्र 'मधुलिका' कोशल राज्य की एक साधारण देशभक्त कन्या है, जिसके पिता सिंहमित्र ने कभी युद्ध में राज्य की रक्षा की थी। कोशल के नियम के अनुसार, कृषि-उत्सव के लिए राजा उसकी उपजाऊ भूमि अधिग्रहित कर लेते हैं और बदले में मिलने वाले स्वर्ण पुरस्कार को मधुलिका अपने स्वाभिमान के कारण अस्वीकार कर देती है। इसी बीच, मगध का निर्वासित राजकुमार 'अरुण' उसके जीवन में आता है, जो मधुलिका के प्रति आकर्षित है और कोशल राज्य पर आक्रमण कर उसे जीतने की गुप्त योजना बनाता है। मधुलिका अरुण के प्रेम में बहकर पहले तो उसकी मदद करती है, लेकिन अंतिम क्षणों में उसकी राष्ट्रभक्ति जाग उठती है और वह कोशल के राजा को अरुण के इस गुप्त षड्यंत्र की जानकारी देकर अपने देश को विनाश से बचा लेती है। राजा अरुण को मृत्युदंड देते हैं और मधुलिका की इस महान देशभक्ति से प्रसन्न होकर उसे मनचाहा पुरस्कार माँगने को कहते हैं। इस अंतिम और मर्मस्पर्शी मोड़ पर, मधुलिका पुरस्कार के रूप में स्वयं के लिए भी 'प्राणदंड' माँगती है और अरुण के पास जाकर खड़ी हो जाती है। प्रसाद जी ने इस कहानी में कर्तव्य, व्यक्तिगत भावनाओं, त्याग और स्वाभिमान के उस उच्चतम शिखर को दर्शाया है जो पाठकों के हृदय को गहराई से झकझोर देता है।
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