Prem Panth Aiso Kathin by Osho,(GRADE-A)
ओशो की पुस्तक "प्रेम-पंथ ऐसो कठिन" के विषय (Book Matter) का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:पुस्तक का मुख्य परिचयमूल सार: यह पुस्तक ओशो द्वारा दिए गए 15 प्रश्नोत्तर प्रवचनों का एक अद्भुत संकलन है। इसमें साधकों और शिष्यों द्वारा ध्यान, प्रेम और जीवन से जुड़े व्यावहारिक और गहरे प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।शैली: इन प्रवचनों को ओशो ने अपनी चिरपरिचित शैली में शेरो-शायरी, सूफी कविताओं और सुबोध दृष्टांतों से सजाया है, जिससे प्रेम का यह कठिन मार्ग भी अत्यंत सुगम और रसपूर्ण प्रतीत होने लगता है।विषय-वस्तु का विस्तृत विवरण (Book Matter Description)1. प्रेम का वास्तविक अर्थ और अहंकारओशो के अनुसार, सच्चा प्रेम कोई अस्वाभाविक या सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह चैतन्य (Consciousness) की एक आंतरिक दशा है। आम तौर पर लोग जिसे प्रेम कहते हैं, वह केवल "मोह या अधिकार" है। ओशो समझाते हैं कि जहाँ अहंकार प्रेम पर कब्जा कर लेता है, वहीं प्रेम बंधन बन जाता है। सच्चा प्रेम न तो किसी पर कब्जा करता है और न खुद पर अधिकार होने देता है, यह पूरी तरह मुक्तिदायी और स्वतंत्रता का आदान-प्रदान है।2. प्रेम और ध्यान का अंतर्संबंधपुस्तक में प्रेम के मार्ग और ध्यान के मार्ग की कठिनाइयों को समान रूप से सुलझाया गया है। ओशो का प्रसिद्ध सूत्र है: "ध्यान के दीयों को जलाओ और प्रेम के गीतों को गाओ।" उनका मानना है कि यदि मनुष्य अपने जीवन में इन दोनों तत्वों को ले आए, तो वह पृथ्वी पर ही स्वर्ग का अनुभव कर सकता है。3. सामाजिक और धार्मिक पाखंडों पर चोटइस प्रवचनमाला में ओशो पारंपरिक साधु-संतों और समाज द्वारा परोसी जाने वाली झूठी सांत्वनाओं पर तीखा प्रहार करते हैं। वे कहते हैं कि लोग सत्य नहीं बल्कि "मीठा झूठ" चाहते हैं ताकि उन्हें अपने जीवन को बदलना न पड़े। प्रेम का पथ इसलिए कठिन है क्योंकि यह आपसे अपनी पुरानी आदतों और झूठे अहंकार की 'शल्य-चिकित्सा' (Surgery) की मांग करता है。4. रूपांतरण और संन्यासइस पुस्तक का केंद्रीय विषय मनुष्य का आत्म-रूपांतरण है। शून्य होने का साहस ही संन्यास है और अपने भीतर छिपे बीजरूप प्रेम को विकसित करना ही ईश्वर की सच्ची खोज है。