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Prasad Ka Kavya by Prem Shankar (GRADE-D)
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Rs. 57.00
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Rs. 95.00
यह पुस्तक आधुनिक हिंदी साहित्य के महान छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद के काव्य संसार की गहन समीक्षा और विवेचना करने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आलोचनात्मक ग्रंथ है। डॉ. प्रेमशंकर द्वारा रचित यह कृति प्रसाद जी की कविताओं को केंद्र में रखकर लिखा गया हिंदी साहित्य का पहला व्यवस्थित शोध-प्रयत्न माना जाता है। इस पुस्तक में लेखक ने महाकवि प्रसाद की शुरुआती ब्रजभाषा की रचनाओं से लेकर 'झरना', 'आँसू', 'लहर' और उनके कालजयी महाकाव्य 'कामायनी' तक की पूरी विकास-यात्रा का भीतरी और बाहरी विश्लेषण प्रस्तुत किया है। कृति में बहुत ही स्पष्ट और दार्शनिक दृष्टिकोण के साथ दर्शाया गया है कि कैसे प्रसाद जी ने खड़ी बोली को एक समृद्ध काव्य-भाषा के रूप में स्थापित किया और अपनी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना, मानवीय करुणा, रहस्यवाद और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को पिरोया। हिंदी आलोचना की दुनिया में यह पुस्तक जयशंकर प्रसाद की काव्य-चेतना, उनके गीति-तत्व और दार्शनिक विचारों को समझने के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका मानी जाती है।
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