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Pragya ki Anubhuti (Manastantra se pare) by Dada Gavand.(GRADE-A)

Pragya ki Anubhuti (Manastantra se pare) by Dada Gavand.(GRADE-A)

Sale price  Rs. 320.00 Regular price  Rs. 400.00

यह चित्र दादा गावंड (Dada Gavand) की पुस्तक का है, जिसका शीर्षक 'प्रज्ञा की अनुभूति: मानसतंत्र से परे' है।पुस्तक का विवरण:लेखक: दादा गावंड, जो एक आध्यात्मिक विचारक और दार्शनिक थे।विषय: यह पुस्तक उनकी जीवनगाथा (आत्मकथा) है। इसमें उन्होंने अपने आध्यात्मिक अनुभवों और 'मानसतंत्र' (मन की कार्यप्रणाली) से परे जाने की यात्रा का वर्णन किया है।मुख्य संदेश: मुखपृष्ठ पर लिखा है "सुना रहे हैं अपनी जीवनगाथा!", जो यह दर्शाता है कि इसमें उनके व्यक्तिगत बोध और प्रज्ञा (Wisdom) के जाग्रत होने की कहानी है।चित्र में दादा गावंड की एक सौम्य और गंभीर छवि दिखाई दे रही है, जो उनके शांत और अंतर्मुखी व्यक्तित्व को दर्शाती है।

 

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