Patrangpur Puran by Mrinal Pandey. (GRADE-C)
इस उपन्यास की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:कथानक: यह उपन्यास पटरंगपुर नामक एक काल्पनिक गाँव के एक कस्बे में विकसित होने की कहानी कहता है। यह कुमाऊं-गढ़वाल के पहाड़ी अंचल के जीवन में ग्यारह पीढ़ियों के दौरान आए सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाता है।कालखंड: इसमें काली कुमाऊं के राजाओं के समय से लेकर भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति तक के विशाल कालखंड को समेटा गया है।शैली: उपन्यास में परिनिष्ठित हिंदी के साथ-साथ पहाड़ी शब्दों और स्थानीय कथन-शैलियों का खूबसूरती से प्रयोग किया गया है, जो पाठक को उस क्षेत्र के लोक-इतिहास और जीवंत संस्कृति से जोड़ता है।प्रतीक: इसकी कथा "बिष्णुकुटी की आमा" की ज़बानी चलती है, जो कहानियों और कि़स्सों की खान मानी जाती हैं।
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