शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय का परिणीता हिंदी/बांग्ला साहित्य की सबसे लोकप्रिय प्रेमकथाओं में से एक है। इसमें ललिता और शेखर की मासूम मगर गहरी प्रेमकथा सामाजिक बंधनों और परंपरागत मान्यताओं के बीच आगे बढ़ती है। सरल भाषा और मानवीय भावनाओं की गहराई के कारण यह उपन्यास पाठकों को गहराई तक छू लेता है। प्रेम, संस्कार और सामाजिक बाधाओं का यह अनूठा चित्रण आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है। परिणीता मासूम प्रेम और सामाजिक परंपराओं के टकराव की कहानी है। ललिता और शेखर के पात्र भारतीय समाज की जटिलताओं और भावनाओं को जीवंत करते हैं। शरतचन्द्र की लेखनी मानवीय रिश्तों की सूक्ष्मता और संवेदनाओं को सहजता से सामने लाती है। यह उपन्यास भारतीय साहित्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है और हर पाठक के संग्रह में होना चाहिए।