Mridula Srivastava Yatrabodh । यात्राबोध Hindi Edition
यात्राबोध, समकालीन सामाजिक परिस्थितियों में समानांतर रूप से चलती हुई उलझे सुलझे दो पुलिस अफसरों की कहानी है। जहाँ एक अपनी दृढ़संकल्प शक्ति से कार्य निष्पादन करने में सक्षम है, वहीं दूसरा उस बारिश के पानी की तरह है जिसका पृथ्वी पर आगमन शुद्ध रूप में हुआ तो है लेकिन उसके अंदर जीवन यात्राबोध न होने से समाज द्वारा रची गई माया के प्रपंच में उलझ जाता है और अनजाने में ही जीवन भर नाना प्रकार की गंदगी को एकत्र कर अपने जीवन को घोर यातना में डाल देता है। इस कहानी में और भी कई पात्रों का समावेश है, जो इंसानी नादानी, मनःस्थिति, अंतर्मुखी भाव, क्षोभ, अंतर्पीड़ा और साथ ही साथ समाज की विडंबनाओं और विसंगतियों को दर्शाते हैं।.
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