Mera Mujh Mein Kuchh Nahin.(GRADE-A)
मुख्य विषय और सार (Core Theme)यह पुस्तक ओशो के उन प्रवचनों का संग्रह है जो मुख्य रूप से संत कबीरदास जी के भजनों और पदों पर आधारित हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश अहंकार (Ego) को पूरी तरह से मिटाकर शून्यता (शून्य हो जाने) को उपलब्ध होना है। ओशो समझाते हैं कि जब मनुष्य के भीतर से 'मैं' या 'मेरा' का भाव समाप्त हो जाता है, तभी वास्तविक परमात्मा या सत्य का जन्म होता है।पुस्तक के मुख्य बिंदु (Key Highlights)अहंकार का विसर्जन: जब तक आपके भीतर कुछ पाने या बनने की आकांक्षा है, तब तक भ्रम बना रहता है। अहंकार के गिरते ही चेतना पूरी तरह से मुक्त हो जाती है।संसार में रहकर संन्यास: कबीर के माध्यम से ओशो बताते हैं कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी कैसे कमल के फूल की तरह अछूते और संन्यासी रहा जा सकता है।कल्पना और सत्य का अंतर: मनुष्य अक्सर अपनी आशाओं और इच्छाओं के जाल में जीता है। ओशो मन के इन जालों को तोड़कर जीवन को वैसा ही देखने की कला सिखाते हैं जैसा वह वास्तव में है।परमात्मा का वास्तविक स्वरूप: परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक सृजनात्मक शून्यता (Creative Nothingness) है, जिसे केवल स्वयं को पूरी तरह मिटाकर ही अनुभव किया जा सकता है।