Main Yamuna Hoon Aur Jeena Chahati Hoon.(GRADE-A)
यह चित्र "मैं यमुना हूँ और जीना चाहती हूँ" नामक एक हिंदी पुस्तक का मुख्य पृष्ठ (कवर पेज) दिखाता है।
मुख्य विवरण:
शीर्षक: पुस्तक का नाम बड़े और साफ अक्षरों में "मैं यमुना हूँ और जीना चाहती हूँ" लिखा है।
लेखिका: कवर के निचले हिस्से में लेखिका का नाम पूजा मेहरोत्रा अंकित है।
कवर चित्र: पृष्ठभूमि में यमुना नदी की स्थिति को दर्शाया गया है, जिसमें एक तरफ पानी में तैरता हुआ कचरा और प्रदूषण दिखाई दे रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
यदि आप इस पुस्तक के विषय, समीक्षा या लेखिका के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।
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वरिष्ठ लेखिका पूजा मेहरोत्रा द्वारा लिखित पुस्तक "मैं यमुना हूँ और जीना चाहती हूँ" का संक्षिप्त सारांश (Book Matter Description) निम्नलिखित है:
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पुस्तक का संक्षिप्त परिचय (Book Matter)
यह पुस्तक केवल यमुना नदी के उद्गम से लेकर समुद्र में विलीन होने की भौगोलिक गाथा नहीं कहती, बल्कि आज के समय का एक बहुत ही कड़वा सच हमारे सामने रखती है। जीवनदायिनी और देव-तुल्य कही जाने वाली यमुना नदी आज प्रदूषण के कारण दम तोड़ रही है और खुद अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इंसानों से गुहार लगा रही मुख्य विषय-वस्तु:अस्तित्व का संकट: अरावली की पहाड़ियों से कल-कल बहने वाली यमुना का पावन और नीला जल आज दिल्ली और आस-पास के शहरी कचरे तथा औद्योगिक प्रदूषण के कारण काले और जहरीले पानी में बदल चुका हैमानवीय निष्ठुरता पर प्रहार: जिस यमुना के तट पर भारतीय सभ्यता, संस्कृति और महान नगरों का जन्म हुआ, आज उसी के आंचल को आधुनिक समाज ने कचरे से भर दिया है। लेखिका ने समाज और सरकार की इस उदासीनता पर तीखे सवाल उठाए हैं।
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