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Lahar by Jaishankar Prasad (GRADE-B)

Lahar by Jaishankar Prasad (GRADE-B)

Sale price  Rs. 37.00 Regular price  Rs. 50.00

 'लहर' महाकवि जयशंकर प्रसाद के प्रौढ़ रचनाकाल (1930 से 1935 ईस्वी के बीच) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सर्वोत्कृष्ट कृति है. यह पुस्तक उनके भीतर उठने वाले भावों, विचारों और अनुभूतियों की मधुर 'लहरों' का एक सुंदर संकलन है. इस संग्रह में कुल 33 कविताएँ शामिल हैं, जिनमें 'बीती विभावरी जाग री' (प्रकृति-सौंदर्य और राष्ट्र-जागरण का प्रसिद्ध गीत) और 'ले चल वहाँ भुलावा देकर' जैसी कालजयी रचनाएँ संकलित हैं. इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऐतिहासिक और वैचारिक कविताएँ हैं, जैसे 'प्रलय की छाया', 'अशोक की चिंता' और 'शेरसिंह का शस्त्र-समर्पण', जो पाठकों को गहरे दार्शनिक चिंतन और मानवीय संघर्षों से जोड़ती हैं. संपूर्ण काव्य-संग्रह में प्रेम, सौंदर्य, प्रकृति का आलंबन रूप, और अध्यात्म का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो खड़ीबोली हिंदी की मधुरता को चरम पर ले जाता है. यह अमेज़न इंडिया जैसे मंचों पर पाठकों के लिए आसानी से उपलब्ध है

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