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Kamayani Ek Punarvichar by Gajanan Muktibodh (Grade-A)

Kamayani Ek Punarvichar by Gajanan Muktibodh (Grade-A)

Sale price  Rs. 150.00 Regular price  Rs. 175.00
यह पुस्तक पारंपरिक सौंदर्यवादी और रसवादी समीक्षा पद्धतियों से बिल्कुल अलग हटकर लिखी गई एक क्रांतिकारी आलोचनात्मक कृति है। मुक्तिबोध ने इस पुस्तक में जयशंकर प्रसाद की कामायनी को एक "विराट फैंटेसी" के रूप में व्याख्यायित किया है। मार्क्सवादी और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए उन्होंने महाकाव्य के पौराणिक संदर्भों को समकालीन युग की सामाजिक और राजनैतिक प्रासंगिकता से जोड़ा है। इस पुस्तक के माध्यम से मनु, श्रद्धा और इड़ा जैसे पात्र अपनी पारंपरिक दैवीय या ऐतिहासिक छवि को खोकर शुद्ध मानवीय चरित्रों के रूप में सामने आते हैं, जो तत्कालीन पूंजीवादी और सामंती विसंगतियों के बीच अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हिंदी साहित्य में इस कृति को समीक्षा के क्षेत्र में एक सर्वथा नवीन विवेचन-विश्लेषण-पद्धति का मील का पत्थर माना जाता है, जो खुद मुक्तिबोध की जटिल कविताओं और उनकी रचना-प्रक्रिया को समझने के लिए भी एक आधार-ग्रंथ का कार्य करती है।
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