Jo Pehle Apna Ghar Jaare 3 by Arun Maheshwari and Sarla Maheswari (GRADE-C)
यह पुस्तक प्रख्यात जन-कवि हरीश भादानी द्वारा रचित एक बेहद प्रभावशाली और जनवादी चेतना से ओतप्रोत काव्य-कृति है, जिसे 'हरीश भादानी रचना समग्र' के अंतर्गत संपादक अरुण माहेश्वरी और सरला माहेश्वरी द्वारा संकलित किया गया है। इस पुस्तक का शीर्षक प्रसिद्ध संत कबीरदास की कालजयी पंक्ति "जो घर जारे आपना, चले हमारे साथ" से प्रेरित है, जो क्रांति और समाज सुधार के मार्ग पर चलने के लिए परम आत्म-बलिदान और सर्वस्व त्याग की मांग करता है। मार्क्सवादी और प्रगतिशील विचारधारा के अनुरूप, भादानी जी ने इन कविताओं के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज में वास्तविक और बड़ा बदलाव लाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपने भीतर के स्वार्थ, मोह और व्यक्तिगत सुखों का त्याग करना पड़ता है। संपादकों ने इस खंड में कवि के क्रांतिकारी तेवर, सामाजिक विषमताओं पर उनके प्रहार और आम जनता के हक की लड़ाई को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।
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