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Jo Dekha Wahi Kah Diya — Hindi Poetry Collection by Reetey Perfect Paperback – 23 September 2025 by Reetey (Author)

Jo Dekha Wahi Kah Diya — Hindi Poetry Collection by Reetey Perfect Paperback – 23 September 2025 by Reetey (Author)

Sale price  Rs. 180.00 Regular price  Rs. 225.00

यह किताब आपके हाथों तक पहुँची है, तो समझिए कि यह मेरी आत्मा का एक हिस्सा है जो अब आपसे साझा हो रहा है। मैं रोज़मर्रा की ज़िंदगी से कुछ लम्हें चुराकर भले ही लिखता रहा हूँ लेकिन लिखना मेरे लिए कभी भी शौक भर नहीं रहा है। रचना की प्रक्रिया सदैव सायास ही रही, लेकिन इसकी उपस्थिति मेरे जीवन में उतनी ही महत्वपूर्ण रही है—जितना साँस लेना और जीना। शब्द मन में कौंधते हैं और अगर उन्हें काग़ज़ पर न उतार दूँ तो कुछ छूट गया-सा लगता है। यह जो आपबीती-सी कुछ बातें हैं या यूँ कहें कि आँखों के सामने से गुज़री मामूली और ज़रूरी घटनाओं को कलमबद्ध किया है, वह अब आप सबों के हवाले है। इस संग्रह में संकलित कविताएँ, हालाँकि कुछ हिस्सा विचारों को महज लयबद्ध करने का प्रयास भऱ है, उसे लिखते हुए कई बार शब्द मेरे लिए ढाल बने, कई बार आईना और कई बार ज़ख्म पर मरहम। मेरे लिए कविता, दरअसल, अनुभव से उपजे शब्दों की वो छाँव है जहाँ दिल और दिमाग़ कुछ पल के लिए ही सही ठहरता है और सुस्ता कर फिर कोडिंग, एल्गोरिदम और की-बोर्ड की दुनिया में उलझने का साहस जुटा पाता है। आत्मसुख की लालसा में उपजे ये शब्द केवल भावनाओं का बहाव है या समय, समाज और आत्मा का आईना, इसका निर्णय आप जैसे प्रबुद्ध पाठकों पर छोड़ता हूँ। मेरा मानना है कि कवि कविता नहीं लिखता बल्कि कविता एक मनुष्य को संवेदना के सांचे में गढ़ता है। इसे रचते हुए मैं शब्द, साहित्य, संवेदना, पारिवारिक और सामाजिक समझ के ज्यादा समीप पहुँच पाया हूँ, ऐसा कह सकता हूँ। काग़ज़ पर उतरे ये अक्षर जिए हुए अनुभवों की प्रतिछाया हैं। एक ऐसी प्रतिछाया जो कभी हौले से मन को छूती है, कभी विचारों के स्वरूप में गूँजती तो कभी चुप्पी में बहुत कुछ कहती है। "जो देखा वही कह दिया” शब्दों से अधिक संवेदना की यात्रा है जिसमें अकेलेपन और उम्मीदों की, रिश्तों और संघर्षों की, प्रेम और तन्हाई की दास्तां दर्ज है। इन रचनाओं में कभी उदासी है तो कभी प्रतिरोध, कहीं मोहब्बत की नमी है तो कहीं जीवन की सख़्ती। यहाँ सच कई रूपों में सामने आता है— कभी व्यक्तिगत, कभी सामाजिक और कभी सार्वभौमिक। इस संकलन के जरिए, मैं जीवन के कुछ पन्ने आपके हवाले कर रहा हूँ और मुझे यक़ीन है कि इन्हें पढ़ते हुए आप स्वयं को भी इन पंक्तियों में कहीं-न-कहीं तलाश लेंगे। अगर ऐसा होता है तो लिखने का सारा श्रम सार्थक मानूँगा। ये आपबीती का स्वर जगबीती बने, इसी उम्मीद के साथ ‘जो देखा वही कह दिया’ आपको सौंप रहा हूँ। आपका रीतेय
सितंबर, 2025