Iravati by Jaishankar Prasad (Grade-A)
इरावती जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक अपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास है, जो उनकी मृत्यु के कारण पूरा नहीं हो सका और इसका प्रकाशन मरणोपरांत वर्ष 1940 में हुआ। यह उपन्यास ऐतिहासिक फिक्शन विधा के अंतर्गत आता है, जिसमें शुंग काल की राजनीतिक उथल-पुथल, धार्मिक संक्रमण और सामाजिक संरचना को दर्शाया गया है। कहानी मुख्य रूप से मौर्य वंश के पतन के बाद पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां बौद्ध धर्म और सनातन संस्कृति के बीच के वैचारिक टकराव को बहुत बारीकी से उभारा गया है। प्रसाद जी ने इस अधूरी रचना में भी सामंती व्यवस्था की विसंगतियों, वर्ग भेद और मानवीय संवेदनाओं को बेहद सशक्त पैराग्राफों में पिरोया है। पूरी कहानी मुख्य नायिका इरावती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी सामाजिक और व्यक्तिगत बेड़ियों को तोड़कर आत्म-सम्मान के साथ जीने का प्रयास करती है। भले ही यह उपन्यास अधूरा रह गया, लेकिन यह उस दौर के इतिहास, राजनीति, प्रेम और त्याग के अंतर्द्वंद्व को समझने के लिए आज भी हिंदी साहित्य की एक बेहद महत्वपूर्ण और गंभीर कृति माना जाता है।
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