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Ghumakkad Shastra by Rahul Sankrityayan (GRADE-A)

Ghumakkad Shastra by Rahul Sankrityayan (GRADE-A)

Sale price  Rs. 129.00 Regular price  Rs. 150.00
  • विषय-वस्तु: यह पुस्तक केवल यात्रा संस्मरण नहीं है, बल्कि घुमक्कड़ी (traveling) का एक संपूर्ण दर्शन और शास्त्र है। इसमें लेखक ने बताया है कि एक सच्चा घुमक्कड़ बनने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है।
  • मुख्य संदेश: सांकृत्यायन का मानना था कि दुनिया की प्रगति का मुख्य श्रेय घुमक्कड़ों को जाता है। उन्होंने युवाओं को घर छोड़कर दुनिया देखने का आह्वान किया है, ताकि वे संकीर्ण सोच से ऊपर उठ सकें।
  • अध्याय: पुस्तक में घुमक्कड़ी की तैयारी, इसके फायदे, कठिनाइयाँ और विभिन्न देशों (जैसे तिब्बत, श्रीलंका, सोवियत संघ) की यात्रा के व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
  • प्रसिद्ध पंक्ति: "सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहाँ? जिंदगी गर कुछ रही तो, नौजवानी फिर कहाँ?" (इस शेर के माध्यम से वे यात्रा के महत्व पर जोर देते हैं)।


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