Skip to product information
Devatatma Himalaya by Swami Akhandananda. (GRADE-A)

Devatatma Himalaya by Swami Akhandananda. (GRADE-A)

Sale price  Rs. 30.00 Regular price  Rs. 35.00

यह पुस्तक स्वामी अखण्डानन्द (श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रत्यक्ष संन्यासी शिष्य और रामकृष्ण मिशन के तीसरे अध्यक्ष) द्वारा लिखित एक प्रामाणिक और प्रेरणादायक यात्रा-वृत्तांत (Travelogue) है [2]।इस पुस्तक की मुख्य विषय-वस्तु और विशेषताएँ इस प्रकार हैं:1. विषय-वस्तु (Core Subject)यह पुस्तक स्वामी अखण्डानन्द जी द्वारा 1887 से 1897 के बीच हिमालय क्षेत्र में की गई उनकी अत्यंत कठिन, साहसिक और आध्यात्मिक यात्राओं का संकलन है। इसमें उन्होंने तिब्बत, लद्दाख, बद्रीनाथ, केदारनाथ और हिमालय के अन्य दुर्गम व पवित्र क्षेत्रों के अपने अनुभवों को लिपिबद्ध किया है।2. मुख्य बिंदु और विशेषताएँप्राकृतिक और भौगोलिक वर्णन: पुस्तक में हिमालय की गगनचुंबी चोटियों, पवित्र नदियों के उद्गम स्थलों, घाटियों और वहां के कठिन रास्तों का जीवंत और मनमोहक चित्रण है।आध्यात्मिक दृष्टिकोण: यह केवल एक सामान्य पर्यटन गाइड नहीं है, बल्कि एक उच्च कोटि के साधक के दृष्टिकोण से लिखी गई पुस्तक है। इसमें हिमालय के एकांत में रहने वाले साधु-संतों, गुफाओं और आध्यात्मिक स्पंदन (vibrations) का गहराई से उल्लेख है।सांस्कृतिक और सामाजिक अंतर्दृष्टि: स्वामी जी ने अपनी यात्रा के दौरान वहां के स्थानीय लोगों, तिब्बती संस्कृति, उनके रहन-सहन, रीति-रिवाजों और तत्कालीन सामाजिक स्थिति का बहुत ही बारीकी और तटस्थता से वर्णन किया है।साहस और वैराग्य की गाथा: उस दौर में जब आज जैसी आधुनिक सुविधाएं, सड़कें और संचार के साधन नहीं थे, स्वामी जी ने बिना किसी विशेष संसाधन के, केवल एक फकीर की तरह इन दुर्गम बर्फीले रास्तों को पार किया। यह पुस्तक उनके अद्भुत साहस, अडिग विश्वास और तीव्र वैराग्य को दर्शाती है।3. भाषा और शैलीपुस्तक की भाषा अत्यंत सरल, गंभीर और मर्मस्पर्शी है [2]। यह पाठकों को ऐसा अनुभव कराती है मानो वे स्वयं स्वामी जी के साथ हिमालय की उन पवित्र वादियों की यात्रा कर रहे हों।

Book cover type