Chandrakanta Santati-2 by Babu Devaki Nandan Khatri.(GRADE-B)
यह छवि प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास 'चन्द्रकान्ता सन्तति' के दूसरे भाग (Vol. 2) के मुख्य पृष्ठ (cover) की है।इस उपन्यास के बारे में मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:लेखक: इसके रचयिता बाबू देवकीनन्दन खत्री हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य में 'तिलिस्मी' और 'ऐय्यारी' उपन्यासों का जनक माना जाता है।विषय: यह उपन्यास देवकीनन्दन खत्री के ही पहले प्रसिद्ध उपन्यास 'चन्द्रकान्ता' का अगला भाग (sequel) है। इसमें राजकुमारी चन्द्रकान्ता और राजकुमार वीरेन्द्र सिंह के पुत्रों, इन्द्रजीत सिंह और आनन्द सिंह के कारनामों और उनकी प्रेम कहानी का वर्णन है।मुख्य विशेषताएं:यह कहानी तिलिस्म (जादुई भूलभुलैया), ऐय्यारी (छल-कपट और भेष बदलने की कला), और रोमांच से भरी हुई है।ऐसा कहा जाता है कि इस उपन्यास की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि इसे पढ़ने के लिए हजारों गैर-हिंदी भाषियों ने हिंदी सीखी थी।इस उपन्यास पर आधारित 'चन्द्रकान्ता' धारावाहिक 90 के दशक में दूरदर्शन पर बहुत प्रसिद्ध हुआ था।यह उपन्यास हिंदी साहित्य की एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।
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