C.V. Ramana by Acharya Vimal Dixit.(GRADE-A)
यह जीवनी मुख्य रूप से सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (C.V. Raman) के जीवन संघर्ष, उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा और भारतीय विज्ञान जगत में उनके ऐतिहासिक योगदान को दर्शाती है:प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: 7 नवंबर 1888 को तिरुचिरापल्ली में जन्मे रमन का बचपन अकादमिक माहौल में बीता। मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से भौतिकी (Physics) में स्वर्ण पदक जीतने और अपनी एम.ए. की डिग्री पूरी करने के सफर का इसमें वर्णन है।वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति जुनून: सरकारी नौकरी (वित्तीय सेवा) में होने के बावजूद, विज्ञान के प्रति उनका लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार किया और शोध कार्य जारी रखा।ऐतिहासिक खोज - रमन प्रभाव (Raman Effect): पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साल 1928 में उनके द्वारा की गई "रमन प्रभाव" की खोज पर आधारित है, जिसमें उन्होंने दुनिया को बताया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) में बदलाव आता है।
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