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Brahmarakshas by Gajanan Madhav (Grade-A)
Rs. 99.00
(ब्रह्मराक्षस) कथानक और प्रतीक: यह कविता एक 'ब्रह्मराक्षस' की कहानी है जो एक पुराने बावड़ी (stepwell) में रहता है। यह राक्षस असल में एक ऐसा विद्वान है जिसके पास अगाध ज्ञान तो है, लेकिन वह समाज से कट चुका है और अपने ही विचारों के जाल में फंसा हुआ है.
मुख्य भाव: मुक्तिबोध ने इसके माध्यम से बुद्धिजीवियों की त्रासदी को दर्शाया है। वह ज्ञानी पुरुष जो अपनी प्रतिभा का उपयोग लोक-कल्याण के लिए नहीं कर पाता, वह अंततः अंतर्द्वंद्व (inner conflict) का शिकार होकर 'ब्रह्मराक्षस' बन जाता है.
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