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Bahuri Na Aiso Dao by Osho.(GRADE-A)

Bahuri Na Aiso Dao by Osho.(GRADE-A)

Sale price  Rs. 299.00 Regular price  Rs. 350.00

ओशो (Osho) की पुस्तक "बहुरि न ऐसो दाँव" उनके द्वारा दिए गए अनूठे और गहन प्रश्नोत्तर प्रवचनों का एक प्रामाणिक संकलन है। इस पुस्तक का मूल संदेश मनुष्य को स्वयं के प्रति जागृत करना और जीवन को समग्रता से जीने के लिए प्रेरित करना है।इस पुस्तक की मुख्य विषय-वस्तु (Book Matter Description) इस प्रकार है:मुख्य दार्शनिक संदेशसमय की महत्ता: पुस्तक का मुख्य शीर्षक संत पलटूदास की एक प्रसिद्ध वाणी से प्रेरित है— "बहुरि न ऐसो दाँव, नहीं फिर मानुष होना..."। इसके माध्यम से ओशो यह समझाते हैं कि मानव जीवन एक अत्यंत दुर्लभ अवसर (दाँव) है। मनुष्य को व्यर्थ के विचारों और चिंताओं में अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि यह समय बहुत सीमित है।जीवन को समग्रता से जीना: ओशो रूढ़िवादी और दकियानूसी जीवन शैली की आलोचना करते हैं। उनका मानना है कि जीवन को सुरक्षा के दायरे में रहकर 'न्यूनतम' जीने के बजाय खतरों और चुनौतियों के साथ गहनता व समग्रता से जीना चाहिए।शून्य की साधना: पुस्तक में मन को शांत करने और विचारों से मुक्त होने पर विशेष बल दिया गया है। चौबीस घंटे में कुछ समय के लिए पूर्णतः शांत (शून्यवत) बैठने की सलाह दी गई है, जिससे भीतर का बोध और आनंद प्रकट हो सके।जीवंत धर्म: ओशो संस्थागत धर्मों और उनके अंधविश्वासों की तीखी आलोचना करते हैं। वे कहते हैं कि असली धर्म किसी संस्था या इमारत में नहीं, बल्कि एक जीवंत मनुष्य के भीतर होता है।

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