Antar Vithi by Swami Shivom Tirth.(GRADE-A)
पुस्तक का परिचय एवं मुख्य विषयमूल विषय: यह पुस्तक शक्तिपात (Shaktipat) और कुण्डलिनी महायोग के रहस्यों और क्रियात्मक पक्ष पर आधारित है [1].आंतरिक मार्ग: 'अन्तर्वीथी' का शाब्दिक अर्थ है 'भीतर की वीथी' या 'आंतरिक मार्ग'। इस पुस्तक में साधना के दौरान साधक के भीतर होने वाले सूक्ष्म अनुभवों का वर्णन है.साधना का मार्गदर्शन: इसमें गुरु कृपा से जागृत होने वाली कुण्डलिनी शक्ति के विभिन्न चरणों, प्राण क्रियाओं और ध्यान के समय होने वाले शारीरिक व मानसिक परिवर्तनों को विस्तार से समझाया गया है [1].लेखक का परिचय (स्वामी शिवोम् तीर्थ महाराज)परम्परा: स्वामी शिवोम् तीर्थ जी भगवान महायोग की उस महान परम्परा से थे जिसमें स्वामी गंगाधर तीर्थ जी, स्वामी नारायण तीर्थ जी और स्वामी विष्णु तीर्थ जी महाराज जैसे महान सिद्ध संत हुए [4].लेखन शैली: स्वामी जी का लेखन अत्यंत सरल, व्यावहारिक और प्रामाणिक है। उन्होंने इस कठिन आध्यात्मिक विषय को आम साधकों के समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया है [1, 3].पुस्तक की मुख्य बातेंगुरु-शिष्य संबंध: शक्तिपात दीक्षा में गुरु की चेतना और कृपा का क्या महत्व है, इस पर गहरा प्रकाश डाला गया है [1].प्राण और अपान की गतियां: ध्यान के समय जब शक्ति जाग्रत होती है, तब प्राण शरीर में किस प्रकार गति करते हैं, इसका सूक्ष्म विवरण है.साधना में आने वाली बाधाएं: ध्यान के दौरान उठने वाले विचारों, मानसिक विक्षेपों और उनसे उबरने के व्यावहारिक उपाय बताए गए हैं [8].यदि आप इस पुस्तक को पूरी तरह से पढ़ना चाहते हैं, तो इसका डिजिटल संस्करण इंटरनेट आर्काइव (Internet Archive) पर "Antar Vithi By Shivom Tirth" नाम से ऑनलाइन उपलब्ध है, जहाँ आप इसके सभी अध्यायों को विस्तार से पढ़ सकते हैं
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