ध्रुवस्वामिनी by जयशंकर प्रसाद (GRADE-A)
पुस्तक का परिचयलेखक: जयशंकर प्रसादसमीक्षक एवं व्याख्याकार: डॉ. कृष्णदेव शर्मा और डॉ. माया अग्रवाल (जैसा कि पुस्तक के कवर पर अंकित है)।संपादक: डॉ. बिजेन्द्र सिंघल।नाटक का सारांश और मुख्य बिंदुयह नाटक गुप्त काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसके मुख्य पात्र ध्रुवस्वामिनी, रामगुप्त और चंद्रगुप्त हैं।कथानक: सम्राट समुद्रगुप्त के बाद सत्ता एक कायर और विलासी शासक रामगुप्त के हाथों में आ जाती है। जब शकराज गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण करता है, तो रामगुप्त अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को उपहार स्वरूप शत्रु को सौंपने के लिए तैयार हो जाता है。स्त्री विमर्श: यह नाटक नारी स्वाधीनता और उसके आत्मसम्मान के विद्रोह की कहानी है। ध्रुवस्वामिनी एक ऐसी विद्रोहिणी नारी के रूप में चित्रित है जो पुरुष के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाती है और अपने स्वतंत्र अस्तित्व की घोषणा करती है。विशेषता: यह नाटक प्रसाद जी के अन्य नाटकों की तुलना में अधिक यथार्थवादी और मंच के लिए उपयुक्त माना जाता है。
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