घुमक्कड़ स्वामी by राहुल सांकृत्यायन
पुस्तक का सारांशयह कृति एक यायावर संत स्वामी हरिशरणानंद की जीवन कथा और उनके यात्रा-वृत्तांतों का अनूठा संगम है।कहानी एक ऐसे किशोर की है जिसने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और योगियों की तलाश में हिमालय निकल पड़ा।इसमें स्वामी जी द्वारा उत्तर भारत के कई दुर्गम क्षेत्रों और कैलाश मानसरोवर की साहसिक यात्राओं का वर्णन है।स्वामी जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था; वे न केवल योग साधना में लीन थे, बल्कि उन्हें आयुर्वेद का भी गहरा ज्ञान था और वे औषधीय वनस्पतियों की खोज के लिए भ्रमण करते रहते थे।यह पुस्तक उस समय के संघर्षों, संस्कृति और समाज में फैले पाखंडों पर भी प्रकाश डालती है।लेखक के बारे में (राहुल सांकृत्यायन)राहुल सांकृत्यायन को हिंदी साहित्य में "महापंडित" की उपाधि दी गई है।उन्हें आधुनिक हिंदी यात्रा-साहित्य का जनक माना जाता है। उनका मानना था कि ज्ञान केवल किताबों से नहीं बल्कि अनुभवों और यात्राओं से प्राप्त होता है।उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना "घुमक्कड़-शास्त्र" के माध्यम से "घुमक्कड़ी" को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वस्तु और समाज के लिए हितकारी बताया है।
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