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Thakur ka kua by Munshi Premchand (GRADE-A)

Thakur ka kua by Munshi Premchand (GRADE-A)

Rs. 99.00
यह कहानी भारतीय ग्रामीण समाज में व्याप्त जातिवाद, छुआछूत और अमानवीय शोषण की क्रूर सच्चाई को बहुत ही बेबाकी से उजागर करती है। कहानी के मुख्य पात्र 'जोखू' और उसकी पत्नी 'गंगी' हैं, जो समाज के अछूत माने जाने वाले तबके से ताल्लुक रखते हैं। जोखू गंभीर रूप से बीमार है और उसके घर का पानी सड़ चुका है। बीमारी और प्यास से तड़पते पति के लिए गंगी गाँव के ऊँचे तबके के लोगों के कुएँ से साफ पानी लाने का साहस करती है, जिसे 'ठाकुर का कुआँ' कहा जाता है। जब गंगी रात के अंधेरे में ठाकुर के कुएँ से पानी खींचती है, तभी ठाकुर के घर का दरवाजा खुल जाता है। गंगी डर के मारे रस्सी छोड़ देती है और घड़ा पानी में गिर जाता है। वह खाली हाथ भागकर घर लौटती है, जहाँ वह देखती है कि उसका बीमार पति जोखू वही मैला और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से समाज के उच्च वर्ग की संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार किया है।
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