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Skandagupta by Jaishankar Prasad (Grade-A)
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Rs. 129.00
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Rs. 150.00
यह नाटक गुप्त वंश के अंतिम महान सम्राट स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। कहानी साम्राज्य के आंतरिक गृह-कलह, सिंहासन के लिए होने वाले षड्यंत्रों, और बाहर से होने वाले बर्बर हूणों तथा मालव के आक्रमणों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। जयशंकर प्रसाद ने इस नाटक के माध्यम से इतिहास के एक ऐसे नायक को सामने लाया है जो पारिवारिक कलह, सौतेली माँ के षड्यंत्रों और देश पर मंडराते बाहरी खतरों से अकेले लड़ता है। नाटक में केवल युद्ध और राजनीति ही नहीं है, बल्कि इसमें देवसेना और विजया जैसे पात्रों के माध्यम से प्रेम, त्याग, अधिकार-सुख की इच्छा और वैराग्य के गहरे मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व को भी दिखाया गया है। प्रसाद जी ने इस ऐतिहासिक कथानक का उपयोग अपने समय के पराधीन भारत में राष्ट्रीय चेतना, देशभक्ति और अखंड भारत की भावना को जगाने के लिए एक रूपक (allegory) के तौर पर किया था।
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