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Satya Kahun To by Om Swami.(GRADE-D)

Satya Kahun To by Om Swami.(GRADE-D)

Sale price  Rs. 140.00 Regular price  Rs. 250.00

"सत्य कहूं तो... एक संन्यासी के संस्मरण" (अंग्रेजी शीर्षक: "If Truth Be Told: A Monk's Memoir") आध्यात्मिक गुरु ओम स्वामी की एक बेहद लोकप्रिय और नेशनल बेस्टसेलर आत्मकथा है。 यह पुस्तक मुख्य रूप से भौतिक सुख-सुविधाओं और सफलता की चरम सीमा को देखने के बाद, आंतरिक शांति और ईश्वर की खोज में संन्यास का मार्ग चुनने की एक सच्ची कहानी है।पुस्तक से जुड़े मुख्य विवरण और मुख्य भाग इस प्रकार हैं:1. लेखक की पृष्ठभूमि और सांसारिक सफलताप्रारंभिक जीवन: ओम स्वामी का जन्म भारत के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन में (लगभग 8 वर्ष की उम्र में) उन्हें सपने में दिव्य दर्शन हुए, जिसने उनके भीतर ईश्वर को जानने की गहरी इच्छा जगा दी।करोड़पति बनने का सफर: 18 वर्ष की आयु में वे उच्च शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए。 शुरुआती कड़े संघर्षों के बाद, वे महज 26 साल की उम्र तक एक सफल बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी के सीईओ और करोड़पति (मल्टीमिलियनेयर) बन गए। उनके पास पैसा, रुतबा और पोर्श (Porsche) जैसी महंगी गाड़ियां थीं。2. वैराग्य और आंतरिक अशांतिअधूरापन: अपार धन-दौलत और भौतिक सुखों के बावजूद, उनके मन के भीतर की बेचैनी और खालीपन दूर नहीं हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि सांसारिक सुख उनकी आत्मा की खोज को संतुष्ट नहीं कर सकते。सबकुछ छोड़ना: अंततः, वर्ष 2010 में उन्होंने अपनी करोड़ों की कंपनी, व्यवसाय और सुख-सुविधाओं को पूरी तरह से त्याग दिया और आध्यात्मिक सत्य की तलाश में वापस भारत लौट आए।3. हिमालय में कठिन साधनाकठिन परिस्थितियां: उन्होंने भारत आकर संन्यास दीक्षा ली और हिमालय की तलहटी व कंदराओं में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में समय बिताया。प्रकृति से संघर्ष: एकांतवास के दौरान उन्होंने तीव्र भूख, जमा देने वाली ठंड, जंगलो के हिंसक जानवरों और गंभीर बीमारियों का सामना करते हुए मौत से लड़ाई लड़ी。 उन्होंने इस दौरान कई महीनों तक तंत्र, ज्योतिष और गहन ध्यान (Meditation) का अभ्यास किया।4. आत्मबोध (The Ultimate Realization)अंततः, तीव्र और घोर साधना के बाद उन्हें परम सत्य और आत्मबोध की प्राप्ति हुई। उनकी इस खोज का मुख्य निष्कर्ष था: "मैं जिसे बाहर ढूंढ रहा था, वह स्वयं मेरे भीतर ही है" ('I am what I have been seeking')। यही अनुभव उनकी शिक्षाओं का मुख्य आधार बना।पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं:सरल और निष्कपट लेखन: पाठकों के अनुसार, इस पुस्तक में लेखक ने किसी भी प्रकार का आडंबर या उपदेशात्मक शैली नहीं अपनाई है。 उन्होंने अपने संदेहों, मानवीय कमजोरियों, और संघर्षों को बेहद ईमानदारी (Candour) और हल्की-फुल्की हास्य शैली के साथ साझा किया है。आधुनिक पाठकों के लिए प्रासंगिक: यह किताब आज के इस प्रतिस्पर्धी, तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे युग में यह समझने के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शिका है कि वास्तविक शांति और जीवन का उद्देश्य क्या है।

 

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