"Patanjali Yog Sutra Bhag Paanch" (Part 5) by Osho.(GRADE-B)
यह पुस्तक "पतंजलि योग-सूत्र (भाग-5)" है, जिसका उपशीर्षक "बुलाते हैं फिर तुम्हें" है। यह आध्यात्मिक गुरु ओशो (आचार्य रजनीश) के प्रवचनों का संकलन है।इस पुस्तक की मुख्य विशेषताएं और विवरण निम्नलिखित हैं:विषय: यह पुस्तक महर्षि पतंजलि के प्राचीन 'योग-सूत्रों' पर ओशो की व्याख्या है। इसमें ओशो योग को केवल एक दर्शन नहीं, बल्कि "चेतना का विज्ञान" (Science of Consciousness) मानते हैं।प्रमुख चर्चा: भाग-5 में विशेष रूप से समाधि, ध्यान, संयम और पंचभूतों (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) पर विजय प्राप्त करने के सूत्रों की सरल व्याख्या की गई है।दृष्टिकोण: ओशो के अनुसार, योग का अर्थ केवल शारीरिक आसन नहीं है, बल्कि यह मन की एकाग्रता, आत्म-साक्षात्कार और आत्म-अनुशासन का मार्ग है।प्रकाशक और पृष्ठ: यह पुस्तक आमतौर पर 'डायमंड बुक्स' या 'फ्यूजन बुक्स' द्वारा प्रकाशित की जाती है और इसमें लगभग 510-512 पृष्ठ होते हैं।यह पुस्तक उन साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो योग के गहन आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को सरल भाषा में समझना चाहते हैं।