Pasang by daya Pawar (GRADE-B)
प्रसिद्ध मराठी दलित लेखक दया पवार द्वारा रचित 'पासंग' समाज के उपेक्षित और हाशिए पर खड़े वर्गों की वास्तविकताओं को उजागर करने वाली एक अत्यंत प्रभावशाली कृति है। मराठी भाषा में 'पासंग' शब्द का अर्थ तराजू के पलड़ों को बराबर करने के लिए रखा जाने वाला एक छोटा सा भार होता है, जिसे प्रतीक बनाकर लेखक ने समाज के उन अदृश्य लोगों की कहानी पेश की है जो व्यवस्था में अपनी छोटी भूमिका से भी बहुत बड़ा संतुलन और बदलाव लाते हैं। इस पुस्तक में लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और तीखे सामाजिक-राजनीतिक निबंधों का एक अनूठा संग्रह शामिल है जो जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और मानवीय संवेदनाओं को बहुत ही गहराई और ईमानदारी के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है।
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