Pariksha Guru by Lala Shrinivas Das (GRADE-A)
यह ऐतिहासिक उपन्यास 19वीं सदी के भारतीय समाज के उस संक्रांति काल को दर्शाता है जब पारंपरिक मूल्य और आधुनिक पश्चिमी प्रभाव आपस में टकरा रहे थे। कहानी दिल्ली के एक समृद्ध वैश्य परिवार के लाड़ले रईस लाला मदनमोहन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन में सही मार्गदर्शन न मिलने और युवावस्था में चालाक, लालची और खुशामदी दोस्तों की गलत संगति में पड़कर अंधाधुंध पैसा बहाने लगता है। वह अपने सच्चे हितैषी और वकील मित्र ब्रजकिशोर की नेक सलाहों को नजरअंदाज कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप वह भारी कर्ज में डूब जाता है और उसे जेल की हवा भी खानी पड़ती है। जब संकट के समय उसके वे मतलबी दोस्त उसका साथ छोड़ देते हैं, तब केवल ब्रजकिशोर ही उसकी सच्ची 'परीक्षा' में खरा उतरकर उसे संकट से बाहर निकालता है और उसकी खोई हुई संपत्ति वापस दिलाता है। लेखक ने बेहद सरल बोलचाल की भाषा में इस पूरी कथा को बुना है ताकि यह आम पाठकों के लिए एक नैतिक मार्गदर्शिका बन सके और वे समझ सकें कि जीवन में सही और गलत की पहचान केवल विपत्ति के समय ही हो पाती है।
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