Old book / Hindi Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat (खुशवंत सिंह)
पाकिस्तान मेल: भारत-विभाजन की त्रासदी पर आधारित यह उपन्यास
मूलतः उस अटूट लेखकीय विश्वास का नतीजा है जिसके अनुसार अंततः मनुष्यता ही अपने बलिदानों में जीवित रहती है। घटनाक्रम की दृष्टि से 1947 का भयावह पंजाब चारों तरफ हजारों-हजार बैचरबार भटकते लोगों का चीत्कार। बेहिसाब बलात्कार और सामूहिक हत्याएँ । मजहबी वहशत का वह तूफान मनो-माजरा नाम के गाँव को देर तक नहीं छू पाया, और जब हुआ भी तो विनाशकारी परिणाम को इमामबा की बेटी के प्रति जग्गा के बलिदानी प्रेम ने उलट दिया। इस उपन्यास में मानव-चरित्र की परंपरागत अवधारणाएँ ही खंडित नहीं होतीं, धर्म का मानव-विरोधी फ़लसफा और सामाजिक बदलाव से प्रतिवद्ध बौद्धिक छद्म भी उपड़कर सामने आ जाता है।
मेरा लहूलुहान पंजाब: 13 अप्रैल, 1978 को जरनैल सिंह भिंडरावाले
ने धूम-धड़ाके से पंजाब के रंगमंच पर पदार्पण किया। इस घटना से न केवल पंजाब के जन-जीवन में तूफान आया बल्कि पूरे देश को इसका घातक परिणाम भी भुगतना पड़ा। पूरा पंजाब अशांत और आतंकवाद के हाथों क्षत-विक्षत हो गया। सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह की प्रस्तुत पुस्तक सुस्पष्ट रूप से इस समस्या का इतिहास दर्शाती है, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद पंजावियों के गिले-शिकयों और असंतोष का विवरण देती है, और सभी प्रमुख घटनाओं पर रोशनी डालती है। प्रतिनिधि कहानियों: इस संग्रह में खुशवंत सिंह की प्रतिनिधि कहानियों शामिल हैं, जिन्हें उनके तीन कहानी-संग्रहों से चुना गया है। खुशवंत सिंह की कहानियों का संसार न तो सीमित है और न एकायामी, इसीलिए ये कहानियों अपनी विषय-विविधता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। खोखले आदर्शों और दकियानूसी परंपराओं पर कुठारापात करती हुई ये चुटीली कहानियों यदि हमें गुदगुदाती हैं, तो सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
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