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Nirmohi Bhanvara by Prabodh Kumar Sanyal (GRADE-C)

Nirmohi Bhanvara by Prabodh Kumar Sanyal (GRADE-C)

Sale price  Rs. 48.00 Regular price  Rs. 75.00
यह कहानी मुख्य रूप से पार्थ, नवेन्दु और हिना के जीवन और उनके अंतर्संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पारंपरिक प्रेम त्रिकोण की सीमाओं से कहीं आगे निकल जाती है। प्रबोध कुमार सान्याल ने इस उपन्यास के माध्यम से "पक्षी-धर्म" यानी पूर्ण स्वतंत्रता के आवेग और जीवन के सांसारिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त होने की तीव्र चाहना को खूबसूरती से दर्शाया है। कहानी की मुख्य पात्र हिना अपनी मजबूत व्यक्तिगत चेतना के कारण खुद को एक पारंपरिक पत्नी की उस सीमित सामाजिक परिभाषा में ढालने से इंकार कर देती है, जिसकी उम्मीद अक्सर हर पुरुषवादी समाज करता है। वहीं दूसरी ओर पार्थ का चरित्र एक ऐसे सुरक्षित ठिकाने की तरह उभरता है जहाँ हिना और नवेन्दु न केवल खुलकर अपने मन की बातें साझा कर पाते हैं, बल्कि स्वयं को एक नए दृष्टिकोण से समझने का प्रयास भी करते हैं। मूल रूप से बांग्ला में 'बिबागी भ्रमर' नाम से लिखे गए इस उपन्यास का हिंदी अनुवाद इसके मूल माधुर्य, भावुकता और मानवीय स्वभाव की गहरी और अज्ञात परतों को बहुत ही सजीवता के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है।
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