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Narak Masiha by Bhagwandas Morwal (Grade-B)
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Rs. 225.00
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Rs. 299.00
'नरक मसीहा' सुप्रसिद्ध समकालीन कथाकार भगवानदास मोरवाल द्वारा रचित एक अत्यंत यथार्थवादी और विचारोत्तेजक उपन्यास है, जो आधुनिक समाज के एक छिपे हुए स्याह पक्ष को उजागर करता है। इस उपन्यास का मुख्य विषय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भीतरी दुनिया और उनकी कार्यप्रणाली है। लेखक ने बहुत ही तीखे शब्दों में यह दर्शाया है कि कैसे आज के दौर में कुछ तथाकथित सामाजिक संगठन देश के गरीब, असहाय और हाशिए पर खड़े लोगों के दुखों को अपनी तिजोरियाँ भरने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जो लोग कभी समाजसेवा और आदर्शों के प्रति समर्पित दिखते थे, वे कब और कैसे पूरी व्यवस्था, पवित्र विचारों और जनभावनाओं का अपने निजी स्वार्थों के लिए निर्लज्जतापूर्वक उपयोग करने लगते हैं, इसी ताने-बाने को यह कहानी बेनकाब करती है। पैसा कमाने और बैंक बैलेंस बढ़ाने की अंधी होड़ में डूबे इसके पात्र समाज के लिए एक खौफनाक और वीभत्स 'नरक' का निर्माण करते हैं। मोरवाल जी की यह कृति नैतिक मूल्यों के तेजी से होते क्षरण और एनजीओ संस्कृति के नाम पर फलने-फूलने वाले आर्थिक शोषण के तंत्र पर एक कड़ा प्रहार करती है।