Meri Jaan Ke Dushman by Surender Mohan Pathak. (GRADE-A)
यह छवि विख्यात हिंदी जासूसी लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक के लोकप्रिय थ्रिलर उपन्यास "मेरी जान के दुश्मन" की है।उपन्यास का सारांशइस कहानी का मुख्य पात्र योगेंद्र कुमार बत्रा है, जो विशालगढ़ नामक एक काल्पनिक शहर में बैंक कैशियर के रूप में साधारण जीवन व्यतीत करता है। उपन्यास के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:बैंक डकैती: कहानी में मोड़ तब आता है जब बत्रा अनायास ही एक बैंक डकैती का गवाह बन जाता है।अपराधी की पहचान: वह निडर होकर पाँच डाकुओं में से एक की पहचान कर लेता है, जिसकी वजह से उस अपराधी को फाँसी की सज़ा हो जाती है।जान का खतरा: अपने साथी को फाँसी दिलवाने का बदला लेने के लिए बाकी के चार डाकू बत्रा की "जान के दुश्मन" बन जाते हैं।संघर्ष: अपनी जान बचाने के लिए उसे अपनी नौकरी और शहर तक छोड़ना पड़ता है, और वह लगातार मौत के साये में जीने को मजबूर हो जाता है।पुस्तक के बारे में अन्य जानकारीलेखक: सुरेंद्र मोहन पाठक (जिन्हें हिंदी जासूसी साहित्य का "बेताज बादशाह" माना जाता है)।श्रेणी: यह एक स्टैंड-अलोन (स्वतंत्र) थ्रिलर उपन्यास है, जो उनकी प्रसिद्ध 'सुनील' या 'विमल' सीरीज़ का हिस्सा नहीं है।विशेषता: यह उपन्यास मानवीय संवेदनाओं और एक साधारण आदमी के साहस एवं संघर्ष को बहुत सुंदरता से दर्शाता है।