Mahatirth Ke Antim Yatri by Bimal Dey (GRADE-B)
यह पुस्तक 'महातीर्थ के अंतिम यात्री' है, जिसे प्रसिद्ध भू-पर्यटक बिमल दे ने लिखा है। यह उनके तिब्बत और कैलाश-मानसरोवर की रोमांचक यात्रा का यात्रा-वृत्तांत (Travelogue) है।पुस्तक का विवरण:लेखक: बिमल दे।प्रकाशक: लोकभारती प्रकाशन।विषय: यह पुस्तक लेखक की 1956 की तिब्बत यात्रा पर आधारित है। उस समय तिब्बत में राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल रही थीं और विदेशियों के लिए रास्ते बंद हो रहे थे।कहानी का सार: मात्र 15 वर्ष की आयु में लेखक घर से भागकर एक नेपाली तीर्थयात्री दल में शामिल हो गए। उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए 'मौन बाबा' का वेश धारण किया और ल्हासा से होते हुए अकेले ही कैलाश-मानसरोवर की कठिन यात्रा पूरी की।विशेषता: लेखक ने इसे 'एक भिखमंगे की डायरी' कहा है क्योंकि उन्होंने यह यात्रा बिना किसी तैयारी और संसाधनों के की थी। पुस्तक में तिब्बत के तत्कालीन जनजीवन और महातीर्थ का जीवंत वर्णन मिलता है।यह मूल रूप से बंगाली में 'महातीर्थेर शेष यात्री' नाम से लिखी गई थी, जिसका यह हिंदी अनुवाद है।