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Kavitavali (GRADE-A)
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Rs. 160.00
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(उत्तर कांड) कलिकाल और सामाजिक यथार्थ: तुलसीदास जी ने अपने समय के भीषण अकाल, बेरोजगारी और गरीबी का सजीव चित्रण किया है. वे बताते हैं कि 'पेट की आग' (भूख) बुझाने के लिए लोग धर्म-अधर्म का विचार त्याग देते हैं.
- राम की कृपा: तुलसी के अनुसार इस 'पेट की आग' को केवल राम-रूपी घनश्याम (बादल) की कृपा-जल ही बुझा सकती है.
- आत्मविश्वास और समाज: 'धूत कहौ, अवधूत कहौ...' जैसे पदों में तुलसी का समाज के प्रति निर्भीक दृष्टिकोण और राम के प्रति अनन्य समर्पण झलकता है.
- भक्ति का मार्ग: इसमें राम की शरणागति और उनके 'गरीब नवाज' (गरीबों के सहायक) रूप की महिमा का वर्णन है.