Jo Bolen To Harikatha by Osho.(GRADE-A)
यह ओशो की प्रसिद्ध पुस्तक "जो बोलैं तो हरिकथा" है।पुस्तक का परिचययह पुस्तक ओशो के उन महत्वपूर्ण प्रवचनों का संकलन है, जिसमें उन्होंने सहजो के प्रसिद्ध वचनों के माध्यम से जीवन के गहरे रहस्यों को समझाया है। इस किताब का मुख्य संदेश है कि "संन्यास जीवन से विरक्ति नहीं, बल्कि जीवन को संपूर्णता में भोगने की कला है"।मुख्य विषय और अध्यायओशो ने इस पुस्तक में कई आध्यात्मिक और व्यावहारिक विषयों पर चर्चा की है:जीवंत धर्म: धर्म शास्त्रों या सिद्धांतों में नहीं, बल्कि स्वयं के अनुभव में है।शून्य और प्रार्थना: प्रार्थना को "शून्य आनंदभाव" और ध्यान की पराकाष्ठा बताया गया है।धर्म और राजनीति: ओशो के अनुसार, सच्चा धर्म हमेशा राजनीति से दूर रहता है, जबकि झूठा धर्म राजनीति के साथ मेल-जोल रखता है।समाधिस्थ स्वर: जब व्यक्ति विचारों से मुक्त होता है, तो वह एक बांसुरी की तरह हो जाता है जिससे परमात्मा के स्वर बहने लगते हैं।पुस्तक के कुछ प्रमुख विचारअनुभव का महत्व: ओशो कहते हैं कि अनुभव ही व्यक्ति को परिपक्व बनाता है। जीवन वहीं से शुरू होता है जहाँ डर खत्म होता है।भक्ति: वास्तविक भक्ति वह है जो निष्काम हो, जिसमें कुछ पाने की लालसा न हो।प्रेम: प्रेम को धर्म का शिखर और सबसे पवित्र रूप माना गया है।यह पुस्तक उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन के उतार-चढ़ाव, ध्यान और अध्यात्म को एक नई दृष्टि से समझना चाहते हैं।