Jaankidas Tejpal Mansion by Alka Saraogi (GRADE-A)
यह छवि अलका सरावगी द्वारा लिखित प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास 'जानकीदास तेजपाल मैनशन' के मुखपृष्ठ (कवर पेज) को दिखाती है।उपन्यास के बारे में मुख्य जानकारी:लेखिका: अलका सरावगी, जो अपने उपन्यास 'कलि-कथा वाया बाइपास' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन।विषय-वस्तु: यह उपन्यास कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर स्थित 'जानकीदास तेजपाल मैनशन' नाम की एक पुरानी इमारत और उसमें रहने वाले परिवारों के इर्द-गिर्द बुना गया है।कथानक: कहानी का मुख्य पात्र 'जयगोविन्द' है, जो 1970 के दशक में अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर कोलकाता लौटा एक कंप्यूटर इंजीनियर है। उपन्यास में उसकी आत्मकथा और उसके द्वारा लिखे जा रहे अधूरे उपन्यास की दुनिया आपस में गुंथी हुई है।मुख्य थीम: यह उपन्यास विस्थापन, शहरी विकास के नाम पर पुरानी इमारतों का ढहाया जाना और बदलते समाज की विडम्बनाओं को दर्शाता है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे मेट्रो सुरंग की खुदाई जैसी आधुनिक प्रगति एक पुरानी वास्तविकता को नष्ट कर देती है।यह उपन्यास अपने शिल्प और गंभीर सामाजिक विमर्श के लिए हिंदी साहित्य जगत में विशेष स्थान रखता है।