Jaa Ke Bairi Sanmukh Jeevay by Surendra Mohan Pathak.(GRADE-D)
तस्वीर में दिखाई गई पुस्तक प्रसिद्ध भारतीय रहस्य लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का उपन्यास 'जा के बैरी सन्मुख जीवै' है। यह उनके लोकप्रिय 'विमल' (सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल) सीरीज का 44वां उपन्यास है और 'विमल का विस्फोटक संसार' का हिस्सा है।पुस्तक के बारे में मुख्य जानकारी:लेखक: सुरेन्द्र मोहन पाठकसीरीज: विमल सीरीज (विमल का विस्फोटक संसार)विषय/शैली: यह एक क्राइम थ्रिलर (अपराध और रहस्य) उपन्यास है。प्रकाशक: हिंद पॉकेट बुक्स (पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया)。प्रकाशित: यह अगस्त 2019 में प्रकाशित हुई थी。कहानी का संक्षिप्त विवरण:यह उपन्यास 'कहर' उपन्यास के बाद की कहानी को आगे बढ़ाता है। कहानी विमल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपराध की खतरनाक दुनिया में फंसा हुआ एक भगोड़ा है। इस उपन्यास में वह अपने शत्रुओं का डटकर मुकाबला करता है। पुस्तक की शुरुआत गुरुबानी की पंक्तियों से होती है, जिसमें शत्रु को चुनौती देने और साहस के साथ विपत्तियों का सामना करने का संदेश दिया गया है।पुस्तक के कवर पर एक व्यक्ति (विमल का चित्रण) हाथ में रिवॉल्वर लिए खड़ा है और पीछे आग की लपटें दिखाई दे रही हैं, जो कहानी के रोमांचक और 'विस्फोटक' होने का संकेत देती हैं।