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Dhruvswamini by Jaishankar Prasad (GRADE-A)
Rs. 99.00
यह नाट्य-कृति गुप्त साम्राज्य की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। विलासी राजा रामगुप्त अपने राज्य को बचाने के लिए अपनी स्वाभिमानी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को शत्रु शकराज को सौंपने का कायरतापूर्ण निर्णय लेता है। ध्रुवस्वामिनी इस घोर अपमान और पुरुष-प्रधान समाज की रूढ़ियों के खिलाफ खुलकर विद्रोह कर देती है। कुमार चन्द्रगुप्त के सहयोग से वह न केवल अत्याचारी शत्रु का अंत करती है बल्कि कायर रामगुप्त के बंधन से मुक्ति पाकर नारी के आत्म-सम्मान, अधिकार और पुनर्विवाह की एक नई ऐतिहासिक मिसाल पेश करती है।