Dalit Sahitya Ka Saundaryashastra by Omprakash Valmiki (GRADE-A)
यह पुस्तक हिंदी साहित्य के अत्यंत प्रतिष्ठित दलित लेखक और कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा रचित एक युगांतकारी आलोचनात्मक कृति है。 इस पुस्तक में लेखक ने यह प्रतिपादित किया है कि पारंपरिक और स्थापित भारतीय सौन्दर्यशास्त्र (जो संस्कृत और पाश्चात्य सिद्धांतों पर आधारित है) दलित साहित्य के मूल्यांकन में पूरी तरह अक्षम और एकांगी साबित होता है。 वाल्मीकि जी ने इस बात पर कड़ा बल दिया है कि दलित साहित्य की अपनी अलग चेतना, भाषा, बिम्ब और प्रतीक हैं, जो सीधे तौर पर सामाजिक समानता, मानवाधिकार और सदियों के वास्तविक संघर्ष व यातना से उपजे हैं。 यह पुस्तक मुख्यधारा के साहित्य के वर्चस्ववादी मानदंडों को कड़ी चुनौती देती है और एक ऐसे नए, समतावादी सौंदर्यशास्त्र की रूपरेखा तैयार करती है जो सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा को साहित्य की सच्ची कसौटी मानता है。
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