Aur Phool Jharne Lage by Osho. (GRADE-A)
चित्र में दिखाई गई पुस्तक ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा रचित प्रसिद्ध कृति "...और फूल झरने लगे" है। यह मुख्य रूप से ज़ेन (Zen) विचारधारा और बोध कथाओं पर आधारित ओशो के प्रवचनों का संग्रह है।पुस्तक की मुख्य विषय-वस्तु (Book Matter Description)ध्यान और स्वयं का रूपांतरण: ओशो की बातों का मुख्य सार यह है कि समाज या दुनिया को बदलने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को स्वयं बदलना होगा। इस व्यक्तिगत और वैश्विक बदलाव का एकमात्र मार्ग "ध्यान" है।ज़ेन बोध कथाएँ: इस पुस्तक में ग्यारह प्रसिद्ध ज़ेन कहानियों (Zen Stories) को आधार बनाकर मनुष्य के गहरे आध्यात्मिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।अहंकार और मूर्च्छा पर चोट: पुस्तक की प्रत्येक कथा पाठक के ओढ़े हुए नकली सामाजिक मुखौटों और अहंकार (मैं) पर चोट करती है। यह मनुष्य को उसकी अज्ञानता व मूर्च्छा से जगाकर आत्म-बोध (Awakening) की ओर ले जाती है।शून्यता (Emptiness) का रहस्य: पुस्तक के शीर्षक की प्रेरणा बुद्ध के शिष्य सुभूति की कथा से मिलती है। जब सुभूति परम शून्यता (Sublime Emptiness) की अवस्था में एक वृक्ष के नीचे बैठे थे, तब देवताओं द्वारा उन पर आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी थी। ओशो समझाते हैं कि जब भीतर का 'मैं' पूरी तरह मिट जाता है, तब पूरा अस्तित्व आनंदित होकर आप पर फूल बरसाने लगता है।यह पुस्तक साधारण जीवन जी रहे आधुनिक मनुष्यों के अति-सक्रिय मन को शांत करने और आंतरिक बुद्धत्व को प्राप्त करने का एक अनूठा मार्गदर्शक है।
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