Andhere Mein by Gajanan Madhav Mukitbodh
यह कविता आधुनिक हिंदी साहित्य की एक बेहद जटिल, बहुआयामी और रहस्यमयी रचना मानी जाती है, जिसे कवि ने स्वप्न और फैंटेसी (Fantasy) की शैली में लिखा है। कविता की शुरुआत अंधेरे कमरों, तंग गलियों और रहस्यमयी आवाज़ों से होती है, जो मनुष्य के अवचेतन मन और समाज की विकृतियों दोनों का प्रतीक हैं। इस कविता के माध्यम से मुक्तिबोध ने स्वतंत्रता के बाद के भारत का एक अत्यंत यथार्थवादी और निराशाजनक खाका खींचा है, जहाँ आम जनता का शोषण हो रहा है और पूँजीपति, शासक तथा बुद्धिजीवी वर्ग आपस में गठबंधन करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। कविता का नायक इस व्यवस्था के खिलाफ अपने भीतर एक तीव्र आत्म-संघर्ष (Self-conflict) महसूस करता है। वह पूरे समाज में खोई हुई मानवीय गरिमा, क्रांतिकारियों के बलिदान और अपने भीतर के "सत्य" (आत्मा की प्रतिमा) की खोज करने के लिए संघर्षरत है। अंततः, यह कविता मध्यवर्गीय कायरता और निष्क्रियता की तीखी आलोचना करते हुए मनुष्य को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और जन-साधारण से जुड़ने का एक क्रांतिकारी संदेश देती है।