Anbita Vyatit by Kamleshwar (Grade-C)
"अनबीता व्यतीत" प्रख्यात हिंदी साहित्यकार [कमलेश्वर द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनूठा उपन्यास है](1.1.4, 1.3.2), जो आधुनिक समाज में पर्यावरण संकट, प्रदूषण और मानव-प्रकृति के अटूट संबंधों को गहराई से उजागर करता है। वर्ष 2005 में प्रकाशित इस अनूठी साहित्यिक कृति में लेखक ने पारंपरिक विषयों से बिल्कुल अलग हटकर वन्य-संस्कृति, विलुप्त होते मासूम पक्षियों की पीड़ा और इंसानी लालच के कारण प्रकृति के हो रहे अंधाधुंध दोहन को मुख्य विषय बनाया है। कहानी में सन् 1947 के बाद सामंती युग के पतन की पृष्ठभूमि के साथ-साथ समीरा और प्रशांत जैसे किरदारों के माध्यम से सहज मानवीय कोमल संबंधों और पारिवारिक उपेक्षा के दर्द को भी समानांतर रूप से बुना गया है। लेखक ने इस उपन्यास को एक दारुण मृत्यु परंपरा के अंधे अभियान से मुक्ति का आख्यान माना है, जो पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि विकास और आधुनिकीकरण की अंधी होड़ में प्रकृति पर विजय पाने का प्रयास वास्तव में पूरी मानवता की कितनी बड़ी पराजय है
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