Amita by Yashpal (GRADE-A)
'अमिता' प्रगतिशील और समाजवादी विचारधारा के महान कथाकार यशपाल द्वारा सन् १९५६ में रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध ऐतिहासिक-काल्पनिक उपन्यास है. यह उपन्यास सम्राट अशोक के कलिंग आक्रमण की महान ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जहाँ लेखक ने इतिहास के तथ्यों में कल्पना का अनूठा पुट मिलाकर शांति और अहिंसा का एक वैश्विक संदेश दिया है. कहानी का मुख्य केंद्र कलिंग की छोटी, मासूम और निश्चल राजकुमारी 'अमिता' है. कलिंग के राजा की मृत्यु के बाद पूरा राज्य युद्ध और विनाश के खौफ में डूबा हुआ है. जब सम्राट अशोक अपनी विशाल सेना के साथ प्रचंड नरसंहार करते हुए कलिंग के दुर्ग तक पहुँचते हैं, तब यह नन्हीं बालिका अमिता बिना किसी शस्त्र या डर के अपनी बाल-सुलभ निर्भीकता और मासूमियत के साथ अशोक के सामने जाकर खड़ी हो जाती है. उसके निश्छल और निर्दोष सवालों को सुनकर सम्राट अशोक का अहंकार टूट जाता है और उनका हृदय परिवर्तन हो जाता है. यशपाल जी ने इस उपन्यास की रचना तत्कालीन (१९५४-१९५६) विश्व-शांति के प्रयासों से प्रभावित होकर की थी, जिसका मूल मेरुदंड यह दिखाना है कि युद्ध या हिंसा कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते. यह पुस्तक अंतरराष्ट्रीय सह-अस्तित्व, दूसरों की भावनाओं के सम्मान और प्रेम के आधार पर शांति की रक्षा करने की एक पुरज़ोर वकालत करती है.
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