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31 Priya Kahaniyan Paperback by Munshi Premchand (Author)

31 Priya Kahaniyan Paperback by Munshi Premchand (Author)

Sale price  Rs. 180.00 Regular price  Rs. 225.00

(जन्म 31 जुलाई 1880-देहांत अक्टूबर 1936)

मुंशी प्रेमचंद सिर्फ 'कलम का मजदूर' या 'कलम के सिपाही' ही नहीं थे, वे 'कलम के जादूगर' भी थे। वे अपने समय और समाज के जागरूक प्रहरी थे। उनकी कलम ने अपने समाज की लगभग हर तरह की समस्या पर उंगली रखी और ऐसा यथार्थ चित्रण किया कि आज भी वह उस समय के भारतीय ग्रामीण एवं बाहरी जीवन का प्रमाणिक दस्तावेज है। दुनिया भर की भाषाओं में उनके उपन्यासों, कहानियों के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने 18 उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियाँ और सैकड़ों लेख लिखे। चे कलम से ही जीते थे। उन्होंने हंस पत्रिका की स्थापना की। वे प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक रहे। गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि और कफन, पूस की रात, सद्गति, पंच परमेश्वर, हीरा मोती, ठाकुर का कुआं आदि अनेक कथाकृक्तियां विश्व साहित्य में उच्च कोटि का स्थान रखती हैं। आज के समय में प्रेमचंद की कथाओं को पढ़ना एक बार फिर अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को खोजना है। प्रेमचंद साम्राज्यवादी सामदेवादी जीवन स्थितियों और मूल्यों के विपक्ष में सेकुलर प्रगतिशीलता की मशाल जलाने वाले रचनाकार थे। उनकी रचनाएं, आज भी हमें अतीत को बता, वर्तमान को सुलझा भविष्य का संकेत देती हैं।

आज प्रेमचंद की कलम वक्त की जरूरत है। उनकी सरल, सुबोध, चुटीली, व्यंग्यात्मक, मार्मिक भाषा सीधे दिल में उतर जाती है।

आप इन्हें खरीदें, बड़े, दूसरों को भी पढ़ाएं।

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User Name 2 Days ago

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